आज इस ब्लॉग की सुरुआत अपने एक शाम अनुभव से करता हूँ।
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वो मेट्रो ट्रेन में दरवाजे क किनारे बैठा था ,जब मै दाखिल हुआ अंदर ,सो रहा था दारु पी के। मुझे देखा नही गया कि कही कुछ अनहोनी ना हो जाए। मैंने उसे जगाने की कोशिश की जागा नहीं तो उठाने की। उसने मेरा हाथ झटक दिया।फिर कोशिश की तो एक सहयात्री ने कहा,रहने दो ना जब मरना चाहता है मरने दो, मैंने कहा ये तो मर जाएगा पर इंसानियत भी मर जाएगी यही पर, सहयात्री ने फिर सवाल किया अच्छा फिर इतनी अच्छी डील डॉल है इसकी दारु पी के जिंदगी ख़राब कर रहा है, तब इंसानियत नहीं मरी इसकी, सवाल वाजिब था पर मेरे मुह से नजाने क्यों निकला भाई साहब वो लाख बुरा हो पर पता है आस पास सब कुछ होते हुए हमारी जिंदगी क्यों अच्छी नही होती, क्योंकि हम अच्छे इंसान नही होते। इसलिए हमे जब जरुरत हो इंसानियत दिखानी चाहिए , न जाने कब कौन हमारे लिए इंसान बन जाए। खैर उस शराबी को बिठा दिया ऊपर।
हैवान से तो डर के जीती है दुनिया पर जिन्दा है इसी उम्मीद में की इंसानियत अब भी बाकी है।
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वो मेट्रो ट्रेन में दरवाजे क किनारे बैठा था ,जब मै दाखिल हुआ अंदर ,सो रहा था दारु पी के। मुझे देखा नही गया कि कही कुछ अनहोनी ना हो जाए। मैंने उसे जगाने की कोशिश की जागा नहीं तो उठाने की। उसने मेरा हाथ झटक दिया।फिर कोशिश की तो एक सहयात्री ने कहा,रहने दो ना जब मरना चाहता है मरने दो, मैंने कहा ये तो मर जाएगा पर इंसानियत भी मर जाएगी यही पर, सहयात्री ने फिर सवाल किया अच्छा फिर इतनी अच्छी डील डॉल है इसकी दारु पी के जिंदगी ख़राब कर रहा है, तब इंसानियत नहीं मरी इसकी, सवाल वाजिब था पर मेरे मुह से नजाने क्यों निकला भाई साहब वो लाख बुरा हो पर पता है आस पास सब कुछ होते हुए हमारी जिंदगी क्यों अच्छी नही होती, क्योंकि हम अच्छे इंसान नही होते। इसलिए हमे जब जरुरत हो इंसानियत दिखानी चाहिए , न जाने कब कौन हमारे लिए इंसान बन जाए। खैर उस शराबी को बिठा दिया ऊपर।
हैवान से तो डर के जीती है दुनिया पर जिन्दा है इसी उम्मीद में की इंसानियत अब भी बाकी है।
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